संदीप साहा अपने कॉलेज के बहुत ही मशहूर छात्र थे / उनके हंसमुख स्वभाव से उनके बहुत सारे मित्र थे परन्तु उनमे एक कमाल की बात थी ,वह यह की वो किसी का भी परिहास उडाने में अत्यंत माहिर थे /शाम में दोस्तों के साथ मुन्नू चाय की दूकान में उनकी हर दिन बैठक होती थी/ वहां पर दोस्तों के साथ वो किसी न किसी का मजाक अवश्य बनाते थे /एक बार ऐसे ही एक मौके पर बैठक की गतिविधि हो रही थी ,और आज विषय उनके परम मित्र "साजन देहरी" बन गए/साजन यूँ तो काफी शांत स्वभाव के व्यक्ति थे पर जब बात उन पर बन आती तो वो कईयों को मुहकी देने में सक्षम थे/ चाय के बीच में संदीप ने खुलासा किया की साजन को चाय देने से पहले उन्होंने उसमे से एक मख्खी निकाल फेंकी थी ,उनका इतना कहना था कि जोरों के कहकहे लग पड़े ,जिसे सुन कर साजन के चाय की सुरसुराहट बंद हो गयी ,उनका मन चाय और संदीप दोनों के लिए घृणा से भर आया/यूँ तो वो स्थिति सम्हाल सकते थे पर आज नजाने उन्हें इतना बुरा लगा की वो मण्डली छोड़ के जाने लगे /उन्हें यूँ जाता देख एक लहर फिर कहकहों का लगा /और चाय खत्म होने तक वही चर्चा का विषय बने रहे इस बीच उनके स्त्री प्रेम विचारों का भी काफी परिहास हुआ /संदीप अपने आपमें काफी गर्वित महसूस कर रहे थे/इसी समय संदीप भी अपनी चाय का अंतिम घूँट लेते हुए सोच रहे थे उन्होंने कैसे अपने मित्रों को एक झूठ से साजन का इतना गत किया , इसी बीच उन्होंने महसूस किया की उनके मुंह में कुछ अजीब आ गया है ,जब उन्होंने उसे मुंह में निकाला तो तो देख के कहा कि "अरे ये तो मक्खी है "उनका इतना कहना था कि कहकहों का दौर एक बार फिर चल पड़ा/
बहुत खूब
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ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें
dhanyawad!!!
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