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Tuesday, May 4, 2010

ग़लतफ़हमी

सुजय घोष कॉलेज में तो नहीं पर अपनी क्लास की उन हस्तियों में से थे जो अगर कहीं भी अगर दिख जाएँ तो हँस के अपने व्यक्तित्व से कायल कर दें /उनके चारों तरफ एक अलग तरह का जादू होता था जो लोगों को खींच लेनी की अथाह शक्ति रखता था /उनका भाग्य काफी तेज भी था कि उनके मन की मल्लिका यानी सौम्या भ्र्गावी से मिलन भी भगवान् ने सही समय पर परिभाषित कर दिया था और इस तरह उनकी जिंदगी हंसी ख़ुशी प्यार के भावसागर में गोते खाते हुए आनंद की हिलोरें ले रहा था /कमाल की बात ये भी थी की दिल से काफी मैत्रिक थे और दोस्तों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे/साजन उनके उन चंद मित्रों में से थे जिन्हें वो करीबी कहेने से चूकेंगे /वैसे साजन का भाग्य भी काफी चमका हुआ था ,जिसे वैसे लोग भले कुछ और क्यों समझे पर वो भी अपने प्यार के प्यार से संतुष्ट थे /एक बार घोष बाबु चाय के ढाबे पर अपनी सहभागिन के साथ चाय का आनंद ले रहे थे ,इसी बीच साजन भी किसी महिला मित्र के साथ मुन्नू ढाबे में घुसे /सुजय का ध्यान बरबस ही उनकी तरफ चला गया,पर साजन के साथ जो महिला थी वो पक्के तौर पर नेहा महापात्रा तो नहीं थी जिन्हें लोग अभी साजन की संगनी के तौर पर जानते थे /हालाँकि मामला कुछ अलग था साजन के साथ की महिला उनके ही एक मित्र का प्रेमिका थीं और उनके बीच कुछ खटपट के वजह से वो उन्हें सांत्वना देने के लिए ढाबे पर लेके आये थे,सुजय तो थे ही मित्रभाव के व्यक्ति उन्हें लगा की साजन की ये कोई नयी प्रेमिका है तो उन्होंने साजन के इस नए प्रेम के चक्कर में मदद करने की सोची और पहुँच गए साजन के पास और कह पड़े,"और साजन सब बढियां , अरे भाभी जी प्रणाम अरे हमारा साजन अभी नया है इसकी बातों का कभी बुरा मत मानियेगा जाओ साजन चाय आर्डर करो ,साजन जो मालविका को शांत करने लाये थे उन्होंने स्थिति को और जटिल कर दिया और मालविका जोरो से रोने लगी,उस वक़्त सबका चेहरा देखने योग्य हो गया/ आधों को तो खबर भी थी की क्या हुआ , कुछ भाई लोग मारने के लिए भी गए वो तो अच्छा हुआ की मौके पर भाइयों के मित्र सुमीत कश्यप गए जो की सबके दोस्तों के दोस्त और दुश्मनों के बड़े दोस्तों के नाम से जाने जाते थे /