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Thursday, December 17, 2009

यूँ ही चलते चलते...

साजन देहुरी जब भी किसी से मिलते तो उनका दिल जीत लेने वाले व्यक्तियों में से थे. यह घटना भी उनसे ही जुडी हुई ही है साथ ही उनके दोस्त सिद्धार्थ पानिकर का भी इसमें काफी हाथ था. वक़्त था सुबह के नाश्ते का ..क्लास्सेस शरू होनो को थी पर ये हमेशा ही देर से जाने के आदि थे..हालाँकि इनका साथ देने को काफी लोग होते थे पर..ये उनमे से थे जो हमेशा ही नियमित रूप से देर से आते थे.पर इनके बहने बड़े ही दिलचस्प होते थे..मसलन एक बार का वाकया ले लीजिये विभा मैडम के क्लास में इन्होने कहा कि "मैम हम तो जल्दी ही आ रहे थे पर रास्ते में हमे hod ने पकड लिया ,हम क्या करें ..किसी कारनवश उस दिन hod अब्सेंट थीं और दुर्भाग्य से बात बात मैडम को भी मालूम थी...बस फिर हो गयी छुट्टी ..और सिद्धू का डब्बा हो गया .खैर मैम का दिल तो नहीं पसीजा पर फिर भी..है...और यहीं पर साजन अपना व्यक्तित्व कौशल दिखा गए...वो बोले "मैम ये तो कल की बात बता रहा था
हम तो अभी उनके काम को करके आ रहें हैं.."और यों वो बाजी मार गये.

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