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Friday, December 18, 2009
घर जाने वाली ट्रेन
समय रात के १२ बजे थे ,और अभी भी स्टेशन पर चहल पहल थीऔर शायद यही एक वजह थी कि संबित जेना का मन अभी भी स्टेशन पर लगा हुआ था /इन्हें लोग जेना बाबू के नाम से संबोधित करते थे और उनके गरिमामयी व्यक्तित्व से अमूमन हर कोई प्रभावित हो जाता था,उनके होने से ही एक सुरक्षा कि छाँव का एहसास होता था ,पर आज समय विपरीत था ,वो अकेले थे और उन्हें इसका मलाल भी था ,खैर वो स्थिति को समझते थे इसीलिए वो शांत थे और जब वो घर जाते होते तो उन्हें किसी भी गम का एहसास कम ही होता था/यूँ तो दच्छिन भारत के कालेजों में तो उत्तर भारत के पर्वों की छुटियाँ कम ही होती हैं या यों कहें नहीं के बराबर होती है तो ज्यादा उचित होगा /जेना बाबू बाहर से जितने पत्थर दिखते थे उतने ही अन्दर से नरम दिल के थे/उनके साथ कई सफर किये है मैंने ,पर मजाल है की अगर कोई दुखियारा भीख मांगता हुआ उनके पास से खाली हांथ जाये/ कई बार तो वो एक ही भिखारी को दो-दो बार पैसे दे दिया करते थे और ये भी नहीं एक -दो दे दिया ,कभी दस ,कभी पचास /साथ में जो हो वो देख के सोच में पड़ जाये / और फिर तो दिवाली पड़ रही थी पर क्लास्सेस छूटने के डर से कोई घर नहीं जाता था पर जेना बाबू जानते थे कि उनका मन यहाँ नहीं लगेगा इसीलिए आज वो स्टेशन पर थें और घर जाने वाली ट्रेन का इन्तेजार कर रहे थे/
Thursday, December 17, 2009
यूँ ही चलते चलते...
साजन देहुरी जब भी किसी से मिलते तो उनका दिल जीत लेने वाले व्यक्तियों में से थे. यह घटना भी उनसे ही जुडी हुई ही है साथ ही उनके दोस्त सिद्धार्थ पानिकर का भी इसमें काफी हाथ था. वक़्त था सुबह के नाश्ते का ..क्लास्सेस शरू होनो को थी पर ये हमेशा ही देर से जाने के आदि थे..हालाँकि इनका साथ देने को काफी लोग होते थे पर..ये उनमे से थे जो हमेशा ही नियमित रूप से देर से आते थे.पर इनके बहने बड़े ही दिलचस्प होते थे..मसलन एक बार का वाकया ले लीजिये विभा मैडम के क्लास में इन्होने कहा कि "मैम हम तो जल्दी ही आ रहे थे पर रास्ते में हमे hod ने पकड लिया ,हम क्या करें ..किसी कारनवश उस दिन hod अब्सेंट थीं और दुर्भाग्य से बात बात मैडम को भी मालूम थी...बस फिर हो गयी छुट्टी ..और सिद्धू का डब्बा हो गया .खैर मैम का दिल तो नहीं पसीजा पर फिर भी..है...और यहीं पर साजन अपना व्यक्तित्व कौशल दिखा गए...वो बोले "मैम ये तो कल की बात बता रहा था
हम तो अभी उनके काम को करके आ रहें हैं.."और यों वो बाजी मार गये.
हम तो अभी उनके काम को करके आ रहें हैं.."और यों वो बाजी मार गये.
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