आधी रात का समय ,सेल्वा कुमारन अपने छोटे से कमरे में अंगड़ाई ले रहे थे/सुबह से ही काम की अधिकता से उनका पूरा शरीर टूट रहा था/पर हालत ऐसे हो गए कि आँखों में चाह कर भी फूटी कौड़ी नींद न थी/उनकी पत्नी दीपा का न होना आज उन्हें बहुत सता रहा था/वो जानते थे,की आज नहीं तो कल दीपा मायके से जरूर वापस आ जाएगी,पर इस बार का झगडा काफी ज्यादा ही उत्तेजित और हृदय्घाती था/ऐसा नहीं है कि वो दीपा से प्यार नही करते थे, पर एक साधारण कमाने वाले से अधिक चाह रखना कहाँ की बुध्धिमानी है और फिर जब दीपा खुद एक कमाने वाली महिला है,दो साल से घर का मुह भी नहीं देखा उन्होंने ,अचानक उन्होंने देखा की दरवाजे पर ठक ठक कीआवाज हो रही है/रात के ३ बजे कौन होगा,दीपा के बारे में सोच उनका दिल डर से भर आया ,भले उनके बीच कहासुनी क्यों न हुई हो पर है तो वो उनकी पत्नी ही ना ,सुबह से बात भी नहीं हुई है ,क्या पता मायके गयी भी की नहीं,वहां तो जब बात हुई थी तब तक तो नहीं पहुंची थी,आखिर मदुरै चेन्नई से काफी दूर है,समय तो लगेगाही ये सोच के वो निश्चिंत हो गए थे पर अब लग रहा है की उन्होंने कितनी बड़ी गलती कर थी ,उनके मन में अनेक ख़राब ख्याल आने लगे,और उनके दिल की धड़कन, किसी नगाड़े की तरह आवाजे निकाल रहीं थी ,इन चंद पलों में जमीन आसमान एक होने को आ रहा था/उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोला,तो उनकी नींद खुल गयी, और एक भयावह सपने का अंत हुआ/माथे पर पसीने की बुँदे छलक आयीं थीं और धड़कने अभी भी जोर पर थीं /पानी पीने के बाद उन्होंने सोचा कल कैसे भी वो दीपा के लिए जरी की साड़ी लेके आयेंगे आखिर वो उनकी अर्धांगनी है और उसे कल ही वापस लाने जाएँगे /
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Friday, April 30, 2010
अर्धांगनी
आधी रात का समय ,सेल्वा कुमारन अपने छोटे से कमरे में अंगड़ाई ले रहे थे/सुबह से ही काम की अधिकता से उनका पूरा शरीर टूट रहा था/पर हालत ऐसे हो गए कि आँखों में चाह कर भी फूटी कौड़ी नींद न थी/उनकी पत्नी दीपा का न होना आज उन्हें बहुत सता रहा था/वो जानते थे,की आज नहीं तो कल दीपा मायके से जरूर वापस आ जाएगी,पर इस बार का झगडा काफी ज्यादा ही उत्तेजित और हृदय्घाती था/ऐसा नहीं है कि वो दीपा से प्यार नही करते थे, पर एक साधारण कमाने वाले से अधिक चाह रखना कहाँ की बुध्धिमानी है और फिर जब दीपा खुद एक कमाने वाली महिला है,दो साल से घर का मुह भी नहीं देखा उन्होंने ,अचानक उन्होंने देखा की दरवाजे पर ठक ठक कीआवाज हो रही है/रात के ३ बजे कौन होगा,दीपा के बारे में सोच उनका दिल डर से भर आया ,भले उनके बीच कहासुनी क्यों न हुई हो पर है तो वो उनकी पत्नी ही ना ,सुबह से बात भी नहीं हुई है ,क्या पता मायके गयी भी की नहीं,वहां तो जब बात हुई थी तब तक तो नहीं पहुंची थी,आखिर मदुरै चेन्नई से काफी दूर है,समय तो लगेगाही ये सोच के वो निश्चिंत हो गए थे पर अब लग रहा है की उन्होंने कितनी बड़ी गलती कर थी ,उनके मन में अनेक ख़राब ख्याल आने लगे,और उनके दिल की धड़कन, किसी नगाड़े की तरह आवाजे निकाल रहीं थी ,इन चंद पलों में जमीन आसमान एक होने को आ रहा था/उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोला,तो उनकी नींद खुल गयी, और एक भयावह सपने का अंत हुआ/माथे पर पसीने की बुँदे छलक आयीं थीं और धड़कने अभी भी जोर पर थीं /पानी पीने के बाद उन्होंने सोचा कल कैसे भी वो दीपा के लिए जरी की साड़ी लेके आयेंगे आखिर वो उनकी अर्धांगनी है और उसे कल ही वापस लाने जाएँगे /
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