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Sunday, February 7, 2010
महक(शोर्ट स्टोरी)
बात ज्यादा पुरानी नहीं है ,चेन्नई के एक मशहूर इंजीनियरिंग कॉलेज में सांस्कृतिक जलसे का आयोजन था/सिद्धार्थ पनिक्कर और प्रशांत रेशम उसी का आनंद लेने वहां पहुंचे थे/सिद्धार्थ काफी साधारण और शांत तरह के व्यक्ति थे,वहीँ प्रशांत उसके विपरीत नयें विचारों और उन्मत्त स्वाभाव के व्यक्ति थे/पर दोनों में एक समानता तो थी ही कि दोनों ही मांसाहारी थे,और काफी हद तक सिद्धार्थ ,प्रशांत के नए तौर तरीकों से प्रेरित भी थे/वहां काफी घुमने टहलने के बाद उन्होंने सोचा कि थोड़ी पेट पूजा भी हो जाये ,तो एक दूकान से उन्होंने खरीदने का सोचा /प्रशांत ने सिद्धार्थ से पूछा कि तू क्या खायेगा...सिद्धार्थ ने कहा कि कुछ साउथ इंडियन ही खायेगा ,इस पर प्रशांत बुरा सा मुह बना के बोला क्या यार कभी तो कुछ महंगा भी खा लिया कर ,चल आज तुम्हे मैं सवरमा(एक खास तरह की मुर्गे का खाना) खिलाता हूँ...वैसे प्रशांत बड़ी बड़ी बातें बोलता था पर कंजुश भी उतना ही बड़ा था/ खैर सिद्धार्थ ने सवरमा अपने ही पैसे से खाया और उसका पेट भी कुछ ख़राब होने लगा, पर उसने शालीनतावश उसने बाद में प्रशांत से उसकी तारीफ़ भी की/उसके बाद उन्होंने ने जलसे का और लुत्फ़ उठाया और ऐसे ही शाम हो गयी/दोनों अपने घर जाने के लिए निकल पड़े चूँकि घर दूर था और उन्हें बस पकडनी थी तो वे बस स्टैंड पर इंतज़ार करने लगे ,भूख तो दोनों को लग आई थी,प्रशांत ने सिद्धार्थ से कहा यार अब तो बहुत भूख लग रही है और बल्कि मुझे तो सवरमा की महक भी आ रही है ,इस सिद्धार्थ ने हँसते हुए कहा हाँ आएगी क्यों नहीं मुझे सवरमा की डकार जो आ रही है,उस वक़्त प्रशांत का मुह देखने वाला था /
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